क्या इसी को कहते सरकार है

 


कोई सुन नहीं रहा गुहार है,

सिस्टम नहीं सुन्ने को तैयार है,

कैसे चली ये गरम व्यार (करोना) है,

क्यूँ नहीं यह थमने को तैयार है।


कैसे हुई इतनी मौतों की भीड़ है,

काहे न करे इसका उचार है,

कोई सुन नहीं रहा गुहार है,

क्या इसी को कहते 'सरकार' है।


हमने भी लगाई पुकार है,

हर बूढा-बच्चा-जवान यहाँ बिमार है,

यह देसवासियों की ही पुकार है,

लेकिन सिस्टम नहीं सुनने को तैयार है।


नये कार्यालयों की तो भरमार है,

नये अस्पतालों की न छोटी सी कतार है,

चुनावों में हुई नोटों की भरमार है,

महामारी में कुछ न खर्चने को तैयार है। 


क्या इसी को कहते 'सरकार' है?

उखाड़ फेंकनी अब यह सरकार है।


                                         ✍️

                                   'सोमवीर सिंह'


Comments